Hindi Grammar and Composition
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Hindi Grammar and Composition — Quick Facts for UPPSC RO/ARO
Core Grammar Concepts:
- संज्ञा (Noun): व्यक्ति, स्थान, वस्तु, गुण, क्रिया या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं
- सर्वनाम (Pronoun): संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द
- विशेषण (Adjective): संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द
- क्रिया (Verb): कार्य करने या होने के भाव को व्यक्त करने वाले शब्द
- क्रिया-विशेषण (Adverb): क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द
Parts of Speech (वाक्य के पद):
| Hindi | English | Example |
|---|---|---|
| संज्ञा | Noun | पुस्तक, दिल्ली, बालक |
| सर्वनाम | Pronoun | वह, मैं, तुम |
| विशेषण | Adjective | सुंदर, बड़ा, इस |
| क्रिया | Verb | खाना, पढ़ना, जाना |
| क्रिया-विशेषण | Adverb | धीरे, आज, वहाँ |
| योजक (संयोजक) | Conjunction | और, कि, परंतु |
| निपात | Interjection | अरे!, आह!, वाह! |
| उपसर्ग | Prefix | प्र + पुरुष = प्रपुरुष |
| प्रत्यय | Suffix | बालक + इक = बालकीय |
| कारक | Postposition | में, से, के लिए |
कारक (Karak/Case) — Key Points:
| कारक | चिह्न | Example |
|---|---|---|
| कर्ता | -ने (ने) | लड़का पढ़ता है |
| कर्म | -को | लड़के को पुस्तक दो |
| करण | -से | कलम से लिखो |
| संप्रदान | -को/के | बच्चे को खाना दो |
| अधिकरण | में | घर में बैठो |
| संबंध | का/की/के | पिता की कार |
| अपादान | -से | घर से आओ |
समास (Compound/Samas) — Types:
| समास | विग्रह (Separation) | Example |
|---|---|---|
| द्वंद्व | दोनों पदों को मिलाकर | राजा-रानी |
| तत्पुरुष | अंतिम पद प्रधान | गुरुजी का पुत्र (गुरुजी-पुत्र) |
| बहुव्रीहि | दोनों पदों का विशेषण/कर्म | मुखपत्र (मुख के लिए पत्र) |
| कर्मधारय | विशेषण+संज्ञा | महान व्यक्ति |
| देशज | आयातित/स्थानीय | चाय |
छंद (Figures of Speech):
| छंद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुप्रास | एक ही वर्ण/ध्वनि की आवृत्ति | ”वह गिरि पर गंगा धारा” (ग,र,आ का अनुप्रास) |
| यमक | एक ही शब्द का पुनः | ”मूल sanskrit” में मूल |
| उपमा | तुल्यता दर्शाता है | ”मुख चंद्रमा के समान” |
| रूपक | उपमा का लोप | ”तुम मेरे प्रभु हो” |
| अतिशयोक्ति | अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर | ”हड़ताल सैकड़ों वर्ष चली” |
⚡ UPPSC Exam Tips:
- कारक चिह्न सदा संज्ञा/सर्वनाम के साथ लगते हैं, क्रिया के साथ नहीं
- समास-विग्रह में मध्य-पद प्रधान हो तो तत्पुरुष समास
- ‘इस/उस/जो/जैसा’ विशेषण है, ये सर्वनाम के रूप में भी आते हैं
- प्रश्न नकारात्मक हों तो वाक्य-अशुद्धि जाँचें
- लिंग, वचन, कारक में सामंजस्य महत्वपूर्ण
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Hindi Grammar and Composition — UPPSC RO/ARO Study Guide
Overview and Context:
UPPSC RO/ARO (Review Officer/Assistant Review Officer) परीक्षा में हिंदी व्याकरण एक महत्वपूर्ण विषय है। सामान्यतः 20-25 अंक हिंदी व्याकरण के प्रश्न आते हैं जिनमें वाक्य-शुद्धि, समास-विग्रह, कारक-चिह्न, लिंग-परिवर्तन, वचन-परिवर्तन, उपसर्ग-प्रत्यय, मुहावरे-लोकोक्तियाँ, त्रुटि-निवारण और संधि-विच्छेद जैसे विषय आते हैं। इन प्रश्नों में उत्तीर्णता दर औसत रहती है, अतः गहन अभ्यास आवश्यक है।
संज्ञा (Sangya/Noun) — Detailed:
संज्ञा के भेद:
-
व्यक्तिवाचक संज्ञा: किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु को दर्शाता है
- Examples: राम, दिल्ली, गंगा
-
जातिवाचक संज्ञा: समस्त जाति या वर्ग को दर्शाता है
- Examples: कुत्ता, पक्षी, नगर
-
भाववाचक संज्ञा: किसी भाव, गुण, दशा या क्रिया को व्यक्त करता है
- Examples: शांति, सत्य, बोलना (रूप बनता है -ना प्रत्यय से)
-
समूहवाचक संज्ञा: समूह या संग्रह को दर्शाता है
- Examples: भीड़, टीम, परिवार
-
द्रव्यवाचक संज्ञा: द्रव्य या पदार्थ को दर्शाता है
- Examples: सोना, पानी, चावल
लिंग परिवर्तन (Gender Change):
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | नियम |
|---|---|---|
| बालक | बालिका | -क → -का (कभी-कभी) |
| पुरुष | स्त्री | विशेष शब्द |
| माता | पिता | विशेष शब्द |
| सिंह | सिंहनी | -नी प्रत्यय |
| गाय | बैल | विशेष शब्द |
| कवि | कवयित्री | -इत्री प्रत्यय |
वचन परिवर्तन (Number Change):
| एकवचन | बहुवचन |
|---|---|
| पुस्तक | पुस्तकें, पुस्तकों |
| बालक | बालकों, बालकगण |
| लड़की | लड़कियाँ, लड़कियों |
| गाय | गायें, गायें, गायों |
सर्वनाम (Sarvanam/Pronoun) — Detailed:
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| पुरुषवाचक | मैं, तू, वह (प्रथम, द्वितीय, तृतीय) |
| संबंधवाचक | जो, जैसा, जिसका |
| निश्चयवाचक | यह, वह, इस, उस, यहाँ, वहाँ |
| अनिश्चयवाचक | कोई, कुछ, जो कोई |
| प्रश्नवाचक | कौन, क्या, कहाँ, कैसे |
| निजवाचक | आप, स्वयं, अपने आप |
विशेषण (Visheshan/Adjective) — Detailed:
-
गुणवाचक विशेषण: गुण दर्शाता है
- Examples: सुंदर, बड़ा, लंबा
-
परिमाणवाचक विशेषण: मात्रा/संख्या दर्शाता है
- Examples: कुछ, अधिक, पाँच
-
संख्यावाचक विशेषण: स्पष्ट संख्या दर्शाता है
- Examples: एक, दो, तीन (पूर्णांक); पहला, दूसरा (क्रमिक); एक-एक (वितरित)
-
प्रदर्शन विशेषण: निकट/दूर दर्शाता है
- Examples: यह, वह, यहाँ, वहाँ
क्रिया और कारक संबंध:
क्रिया के भेद:
-
सकर्मक क्रिया: कर्म के साथ प्रयुक्त होती है
- Examples: राम पुस्तक पढ़ता है (राम कर्ता, पुस्तक कर्म)
-
अकर्मक क्रिया: बिना कर्म के प्रयुक्त होती है
- Examples: बच्चा सोता है
-
प्रेरणार्थक क्रिया: कराने का भाव
- Examples: शिक्षक छात्र को पढ़ाता है (शिक्षक कर्ता, छात्र कर्म)
-
संयुक्त क्रिया: मुख्य क्रिया + सहायक क्रिया
- Examples: पढ़ लिया, जा रहा हूँ
काल (Tense) — Detailed:
| काल | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| वर्तमान | चल रहा है | मैं पढ़ता हूँ |
| भूतकाल | हो चुका | मैंने पढ़ा |
| भविष्यत् | होगा | मैं पढ़ूँगा |
| वर्तमान निरंतर | रहा है/रही है | वह पढ़ रहा है |
| पूर्ण वर्तमान | चुका है | मैं पढ़ चुका हूँ |
| पूर्ण भूत | था/थी/थे | मैं पढ़ चुका था |
वाच्य (Voice):
| वाच्य | परिवर्तन | उदाहरण |
|---|---|---|
| कर्तृवाच्य | कर्ता प्रधान | मैं पुस्तक पढ़ता हूँ |
| कर्मवाच्य | कर्म प्रधान | मुझे पुस्तक पढ़ी जाती है |
| भाववाच्य | क्रिया प्रधान | मेरे द्वारा पढ़ा जाता है |
अलंकार (Alankar/Figures of Speech) — Detailed:
शब्दालंकार (Word Figures):
-
अनुप्रास: एक ही वर्ण/व्यंजन की आवृत्ति
- “चंद्र उगा, शंकर चंद्र-कला-धारी” (च/र/द/ध की आवृत्ति)
-
यमक: एक ही शब्द का प्रयोग एक से अधिक अर्थ में
- “कहाँ जाओगे कहाँ जाओगे, राधा के चोर”
-
श्लेष: एक शब्द से अनेक अर्थ
- “हम सब के साथ सब दिन साथ” (साथ = संग, दिन = समय)
अर्थालंकार (Meaning Figures):
-
उपमा: ‘के समान/सा’ का प्रयोग
- “आँखें कमल-समान”
-
रूपक: उपमा का लोप, अन्यथाख्यापना
- “तुम मेरे भगवान हो” (भगवान शब्द रूपक)
-
अतिशयोक्ति: बढ़ा-चढ़ाकर कहना
- “हजारों वर्ष बाद”
-
मानवीकरण: अमानवीय को मानवीय गुण देना
- “चंद्रमा मुस्कुराया”
-
संदेह: संभावना दर्शाना
- “जैसे प्रभु सिंहासन पर बैठे हों”
समास (Samas/Compound) — Detailed:
समास के अंग: पूर्वपद और उत्तरपद
समास-प्रकार:
-
द्वंद्व समास: दो पद, दोनों स्वतंत्र
- राम-लक्ष्मण (राम और लक्ष्मण दोनों)
- आज़ाद-पुरुष (आज़ाद पुरुष)
-
तत्पुरुष समास: मध्य-पद प्रधान
- राज-कार्य (राजा का कार्य)
- देश-जीत (देश की जीत)
-
बहुव्रीहि समास: दोनों पद किसी तीसरे के विशेषण
- मुख-पत्र (मुख के लिए पत्र = समाचार-पत्र)
- नील-कमल (नीले रंग का कमल)
-
कर्मधारय समास: विशेषण + संज्ञा
- लाल-आँख (लाल आँखें वाला)
- मीठी-बात (मीठी बात कहने वाला)
-
द्विगु समास: संख्यावाचक + संज्ञा = समूह
- पंच-मछली (पाँच मछलियों का समूह)
- सप्तर्षि (सात ऋषियों का समूह)
-
प्रादि समास: प्रथम पद प्रधान
- भीड़-सा (भीड़ के समान)
संधि (Sandhi/Composition) — Detailed:
विसर्ग संधि: विसर्ग (ः) का परिवर्तन
- अ + ः = अः → कार्य, भवः → भव (ह्रस्व)
- त + ः = थः → मत + हानि → मतघान
- थ + ः = थः → अत्य + हारी → अत्याहार
विराम (Punctuation) — Detailed:
| चिह्न | प्रयोग |
|---|---|
| अल्पविराम (,) | वाक्य के अंगों को पृथक करने में |
| अर्धविराम (;) | वाक्य के बड़े भागों को पृथक करने में |
| पूर्णविराम (।) | वाक्य की समाप्ति में |
| प्रश्नचिह्न (?) | प्रश्नावधि में |
| विस्मयादिबोधक (!) | विस्मय, आश्चर्य में |
| योगचिह्न (-) | अनुवाद, श्रृंखला में |
| **उद्धरणचिह्न (” “) | उद्धरण में |
वाक्य-शुद्धि (Sentence Correction) — Common Errors:
-
कारक-युक्ति: कर्ता-कर्म-क्रिया में सामंजस्य
- अशुद्ध: “मैंने पुस्तक पढ़ा” ✓ (यह शुद्ध है)
- अशुद्ध: “उसने चाय पिया” ✓
-
लिंग-वचन की त्रुटि:
- अशुद्ध: “वह बहुत बड़ा औरत है” (बड़ी होना चाहिए)
- शुद्ध: “वह बहुत बड़ी औरत है”
-
कारक-चिह्न की त्रुटि:
- अशुद्ध: “वह घर जाता है” (घर में होना चाहिए)
- शुद्ध: “वह घर में जाता है”
-
क्रिया-विशेषण की त्रुटि:
- अशुद्ध: “वह धीरे से चलता है” (धीरे से = विशेषण; धीरे = क्रिया-विशेषण)
मुहावरे और लोकोक्तियाँ:
मुहावरा: जिसके अर्थ का बोध वाक्य से हो लोकोक्ति: जो लोक में प्रचलित हो
| मुहावरा | अर्थ |
|---|---|
| आँख का तारा | बहुत प्यारा |
| कान में तेल डालना | बहुत सावधान |
| हाथ का मैल | अत्यंत कठिन परिश्रम |
| नाक में दम करना | परेशान करना |
| लाला-लाल होना | क्रोधित |
| मुँह की खाना | अपमानित करना |
| ऊँट के मुँह में जीरे | अत्यंत कम |
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Hindi Grammar and Composition — Comprehensive UPPSC Notes
Advanced Grammar Concepts:
पद-परिचय (Word Analysis):
प्रत्येक हिंदी शब्द का पद-परिचय चार दृष्टिकोण से होता है:
- स्वरूप: शब्द का मूल रूप
- शब्द-भेद: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया आदि
- लिंग-वचन-पुरुष: संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण के लिए
- कारक-विभक्ति: संज्ञा/सर्वनाम के लिए
उपसर्ग (Upasarga/Prefix) — Complete List:
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ (अन) | निषेध | अज्ञान, अनपढ़ |
| अनु (अनू) | पीछे, अनुसार | अनुभव, अनुराग |
| अति | अधिक | अतिरिक्त, अतिशय |
| अधि | ऊपर | अधिकार, अधिवेशन |
| अनु | साथ | अनुकूल, अनुरूप |
| अप | नीचे, स्व | अपमान, अपवाद |
| आ | प्रारंभ | आदर, आश्चर्य |
| उप | नीचे, समीप | उपकार, उपदेश |
| दुस (दु) | कठिन | दुर्गम, दुर्व्यवहार |
| नि (निर) | बिना | निराशा, निष्क्रिय |
| परि (प्र) | चारों ओर | परिचय, प्रबंध |
| प्र | आगे, श्रेष्ठ | प्रकाश, प्रशंसा |
| स | साथ | सहयोग, संगठन |
| वि (विरु) | विपरीत | विपरीत, विरोध |
प्रत्यय (Pratyaya/Suffix) — Complete List:
तद्धित प्रत्यय (Noun-forming):
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| -ता | भाव | महान + ता = महत्ता |
| -ता | स्थिति | दुख + ता = दुखता |
| -इय | संबंध | गुरु + इय = गुरुीय |
| -ईय | भाव | बालक + ईय = बालकीय |
| -कार | करने वाला | चोर + कार = चोरकार |
| -क | करने वाला | लेख + क = लेखक |
| -नी | स्त्री | बालक + नी = बालिका |
तद्धित प्रत्यय (Adjective-forming):
| प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|
| -मय | सोने + मय = सोनेमय |
| -री | साथ + री = साथरी |
| -हिं | देश + हिं = देशहिं |
| -वान/वाली | गुण + वान = गुणवान |
कृदंत प्रत्यय (Verb-forming):
| प्रत्यय | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| -ना | कर्ता | खाना, पीना |
| -ता | कर्ता | खाता, पीता |
| -हार | करने वाला | दाता, भोक्ता |
विशेष व्याकरण नियम:
समास-विग्रह (Compound Decomposition) — Advanced:
समास पद में प्रायः अंतिम पद प्रधान होता है। तद्घट/तत्पुरुष में कारक-चिह्न का लोप होता है।
| समास | विग्रह | समास-प्रकार |
|---|---|---|
| राज-पुत्र | राजा का पुत्र | तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष) |
| गृह-कार्य | गृह के लिए कार्य | तत्पुरुष (सप्तमी तत्पुरुष) |
| दश-ग्रीव | दस ग्रीवाओं वाला | द्विगु |
| नील-गिरि | नीला पर्वत | कर्मधारय |
| साधु-जन | साधु जनों के समान | बहुव्रीहि |
षष्ठी तत्पुरुष का विग्रह: पूर्वपद + का/की/के + उत्तरपद
सप्तमी तत्पुरुष का विग्रह: पूर्वपद + में/पर/से + उत्तरपद
द्वितीया तत्पुरुष का विग्रह: पूर्वपद + को + उत्तरपद
तृतीया तत्पुरुष का विग्रह: पूर्वपद + से + उत्तरपद
अलंकार — विस्तृत विवेचन:
शब्दालंकार:
अनुप्रास अलंकार के प्रकार:
- व्यंजन अनुप्रास: एक ही व्यंजन की आवृत्ति
- “चारु चंद्र के चरन चाँवर” (च की आवृत्ति)
- स्वर अनुप्रास: स्वर की आवृत्ति
- “भानु भास्वर भानुमान” (आ की आवृत्ति)
यमक अलंकार के प्रकार:
- शब्द-यमक: एक ही शब्द का प्रयोग
- “राम के राम कहिये, जो राम को जाने”
- अर्थ-यमक: एक ही अर्थ के विभिन्न शब्द
- सूर्य, दिनकर, भानु (सबका अर्थ = सूर्य)
श्लेष अलंकार:
- एकार्थी श्लेष: एक शब्द, अनेक अर्थ
- “गिरि” = पर्वत और गोपाल गाय
- प्रावीण्यन्याय्य: दो शब्द, एक अर्थ में
- “नाथ! मुझ जलंधर से न बचावै”
अर्थालंकार — विस्तृत:
उपमा अलंकार: तुल्यता दर्शाने के लिए ‘के समान/सा/सम’ आदि योग्यता-बोधक उपसर्गों का प्रयोग होता है।
रूपक अलंकार: जब उपमा में ‘के समान’ आदि शब्दों का लोप होकर ‘है/हैं/हो’ में परिवर्तित हो जाए, तब रूपक अलंकार होता है।
मेटानैरिया (रूपक का विकास): जब एक ही उपमेय के लिए अनेक उपमान दिए जाएँ: “वह शांत है, जल की तरह, पहाड़ की तरह, आकाश की तरह”
अतिशयोक्ति अलंकार: वस्तु/व्यक्ति/स्थिति का अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन: “उसकी आवाज़ सुनकर पत्थर भी पिघल जाए”
विरोधाभास अलंकार: एक ही वाक्य में परस्पर विरुद्ध भावों का प्रयोग: “मरकर भी जीवित है वह, जो जीकर भी मर गया”
वाक्य-निर्माण और शैली:
वाक्य के भेद (Meaning-based):
-
सरल वाक्य: एक कर्ता, एक क्रिया
- “राम पढ़ता है।”
-
मिश्र वाक्य: एक मुख्य और एक/अनेक आश्रित उपवाक्य
- “जब वह आया, तब मैंने पुस्तक पढ़ी।”
-
संयुक्त वाक्य: दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य
- “वह आया और मैंने पुस्तक पढ़ी।”
वाक्य के भेद (Structure-based):
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| विधायक | किसी बात की जानकारी | वह पढ़ता है। |
| इच्छाबोधक | इच्छा, चाह | वह पढ़े। |
| निषेधाबोधक | नहीं होने का बोध | वह नहीं पढ़ता। |
| प्रश्नाबोधक | प्रश्न | क्या वह पढ़ता है? |
| विस्मयाबोधक | विस्मय | वह कितना पढ़ता है! |
| आज्ञाबोधक | आदेश | पढ़ो! |
शुद्ध वर्तनी (Correct Spelling):
| अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|
| प्रशंसित | प्रशंसित (prashanshit) |
| विशेषतः | विशेषतः (visheshatah) |
| सौंपना | सौंपना (saumpna) |
| पृथक | पृथक (prithak) |
| श्रृंखला | श्रृंखला (shrankhla) |
| लाभान्वित | लाभान्वित (labhanvit) |
विराम-चिह्नों का सही प्रयोग:
अल्पविराम (,) का प्रयोग:
- सूची में: आज, कल, परसों
- उपवाक्यों में: जब वह आया, तब मैंने पुस्तक पढ़ी।
- संबोधन में: राम, तुम जाओ।
- विशेषण के पहले: यह सुंदर, बड़ा घर है।
मात्रिक छंद — Basic:
वर्ण-मात्रा गणना:
| छंद | विशेषता |
|---|---|
| माला | प्रति पंक्ति 16 मात्रा |
| सोरठा | विषम पंक्ति में 12, सम पंक्ति में 8 मात्रा |
| दोहा | विषम पंक्ति में 13, सम पंक्ति में 11 मात्रा |
| चौपाई | प्रति पंक्ति 16 मात्रा |
UPPSC-specific Preparation Strategy:
परीक्षा-पद्धति:
- वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice)
- 25 अंक हिंदी व्याकरण
- समय: 2.5 घंटे (सामान्य हिंदी + तर्कशक्ति)
अध्ययन-क्रम:
- प्रथम सप्ताह: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण
- द्वितीय सप्ताह: क्रिया, कारक, वाच्य, काल
- तृतीय सप्ताह: समास, संधि, उपसर्ग-प्रत्यय
- चतुर्थ सप्ताह: वाक्य-शुद्धि, अलंकार, मुहावरे
Previous Year Trends:
- समास-विग्रह अधिक आता है
- वाक्य-शुद्धि में कर्तृ-कर्म की सामंजस्यता पूछी जाती है
- लोकोक्तियों का अर्थ पूछा जाता है
Practice Questions:
प्रश्न 1: ‘राजा’ का बहुवचन क्या है? उत्तर: राजा → राजागण, राजो, राजा लोग (राजा itself can be used as plural in Hindi)
प्रश्न 2: ‘वह पुस्तक पढ़ता है’ का कर्मवाच्य में परिवर्तन करें। उत्तर: कर्मवाच्य में: पुस्तक उसके द्वारा पढ़ी जाती है।
प्रश्न 3: ‘राम-सीता’ समास का नाम और विग्रह दें। उत्तर: द्वंद्व समास; राम और सीता
प्रश्न 4: ‘अत्याचार’ में उपसर्ग और मूल शब्द पहचानें। उत्तर: अति + आचार; ‘अति’ उपसर्ग है, ‘आचार’ मूल शब्द है।
प्रश्न 5: निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करें: “मैंने उसको चाय दिया।” उत्तर: शुद्ध: “उसको मैंने चाय दी।” (कारक के अनुसार कर्म को प्रथम स्थान)
Common Mistakes in UPPSC:
- समास में ‘इक’ बनाम ‘ईय’ का भ्रम
- कारक-चिह्न लगाने में ‘ने’ और ‘को’ का भ्रम
- तत्पुरुष और बहुव्रीहि में अंतर न कर पाना
- लिंग-परिवर्तन में नियमित और अनियमित शब्दों का भ्रम
अतिरिक्त संसाधन:
- मानक हिंदी व्याकरण — कृष्ण कुमार गोस्वामी
- हिंदी व्याकरण — पं. रामचंद्र शर्मा
- सविता हिंदी व्याकरण कोश — वाग्गर्थ कार्यालय
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